देखिए भगवा का आतंक, देखिए बबवा का आतंक
काटना सिर है उनका काम, मारना सदा विषैले डंक
बहुत-से नूडल बेचे हैं, बहुत-से रुपए खेंचे हैं
है उनके साजन की सरकार, करो मत अभी रंग में भंग
उन्हीं साजन की खातिर
तो, पहन ली थी कमीज़-सलवार
उन्हीं साजन की खातिर
तो, भांजने लगे आज तलवार
हर किसी मर्ज़ की दवा
यहाँ, वो सर्दी-खाँसी हो या
चोट
वीर्य में बढ़वा दें शुक्राणु, पुत्र-जीवक तुम जाओ घोंट
देश बस बाबाओं का है, ये उनके आकाओं का है
जो कहते भारत माँ की
जय, टूट पड़ते फिर खोल लँगोट
बबवा ने सलवार उतारी, भगवा बचा दुपट्टा
हड्डी बेची, ज़हर खिलाया, खूब कमाया चोट्टा
अब तलवार उठाकर निकला
रामदेव ब्योपारी
देखो हिंदू राष्ट्र उफनता साँड़ एक पुंछकट्टा